गरीबी रेखा पर मनमोहन से मिले मोंटेक

नई दिल्ली, २ अक्टूबर। गरीबी की परिभाषा के बारे में योजना आयोग के हलफफनामे को लेकर छ़िडे विवाद के बीच आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की। वह इस मुद्दे पर आज सोवार को स्पष्टीकरण देंगे। सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफफनामे पर विवाद उभरने के बाद प्रधानमंत्री के साथ उनकी यह पहली मुलाकात है। हलफफनामे में आयोग शहरी इलाके में दैनिक ३२ रुपये से अधिक और ग्रामीण इलाकों में दैनिक २६ रुपये से अधिक खर्च करने वालों को गरीबी की रेखा से ऊपर करार दिया है। समझा जाता है कि अहलूवालिया ने रविवार को इस पूरे प्रकरण पर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा की। शपथपत्र के अनुसार शहरी इलाकों में जून, २०११ के मूल्य के हिसाब से मासिक ४,८२४ रुपये से कम क्रयशक्ति वाले पांच सदस्यीय परिवार को ही गरीबी की रेखा से नीचे बीपीएल की श्रेणी में रखा जाएगा। ग्रामीण इलाकों के लिए यह राशि ३,९०५ रुपये निर्धारित की गई है। शपथपत्र में कहा गया है कि बीपीएल का लाभ पाने के हकदार लोगों की संख्या ४०७४ कऱोड है। तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट को जिस समय स्वीकार किया गया था, उस समय यह आंक़डा ३७२ कऱोड का था। योजना आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ज्यादा लोगों को यह लाभ देने से गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम का उद्देश्य खत्म हो जाएगा। समझा जाता है कि कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए योजना आयोग से गरीबी की परिभाषा पर नए सिरे से विचार करने को कहा है। अहलूवालिया आज सोवार को इस मुद्दे पर ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से भी मिलेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी से दो दिन पहले इस बारे में पूछे जाने पर कहा था कि योजना आयोग से हमने इस बारे में पूछा है। उन्होंने कहा है कि यह कोई अंतिम दस्तावेज नहीं है। सोनी ने कहा था कि इन आंक़डों में बदलाव हो सकता है। हो सकता है कि कोई नया आंक़डा आए जिस पर योजना आयोग सहमत हो जाए। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरमैन अरुणा राय और हर्ष मंदार ने भी ३२ रुपये प्रति व्यक्ति की गरीबी की परिभाषा को चुनौती दी है। सोनिया गांधी की अगुवाई वाली एनएसी के अन्य सदस्यों ने भी इस पर आपत्ति जताई है। एनएसी के सदस्य एन सी सक्सेना ने कहा कि ३२ रुपये प्रतिदिन पर सिफर्फ जानवर ही रह सकते हैैं। सक्सेना ने कहा कि जो लोग प्रतिदिन ३२ रुपये से कम खर्च कर रहे हैं, वे निपट गरीबी में हैं।

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