पुरुषों को पछ़ाड कर बनी सेना की पहली महिला जवान

नई दिल्ली , २ अक्टूबर। महिलाओं के लिए सेना का एक और दरवाजा खुल गया है। इसमें २ बच्चों की मां ने पहली महिला जवान होने का गौरव पाया है। फिफजिकल टेस्ट में पुरुषों को पछ़ाड कर ३५ साल की शांति तिग्गा ने टेरिटोरियल आर्मी की ९६९ रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट जॉइन की है। आर्मी के एक सीनियर अफफसर ने बताया कि महिलाओं को सेना की नॉन कॉम्बैट यूनिटों में बतौर अफसर ही ज़ुडने की इजाजत हासिल है। लेकिन शांति तिग्गा को खास उपलब्धि मिली है कि वह १३ लाख लोगों की संख्या वाली सेना में अकेली महिला जवान हैं। उन्होंने तमाम फिफजिकल टेस्ट में शानदार प्रदर्शन किया है। ड़ेढ किलो ीटर की द़ौड पूरी करने में उन्होंने पुरुषों के मुकाबले ५ सेकंड कम समय लिया। उन्होंने ५० मीटर की दूरी १२ सेकंड में तय की, जिसे शानदार माना जाता है। शांति तिग्गा को भारतीय रेलवे में पॉइंट्‌समैन के तौर पर रोजगार मिला था। उनकी नियुक्ति पश्चिम बंगाल के जलपाईग़ुडी जिले में चालसा स्टेशन पर है। शांति ने अपने बारे में बताया कि पति की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर मुझे रेलवे में नौकरी मिली। पिछले साल मुझे टेरिटोरियल आर्मी रेलवे के बारे में पता चला और मैंने इससे ज़ुडना चाहा। तब मुझे पता नहीं था कि कोई महिला आज तक अफफसर रैंक से नीचे सेना से नहीं ज़ुडी है। लेकिन इससे मैं पीछे नहीं हटने वाली थी। मैं हमेशा से सेना से ज़ुडना चाहती थी, ओलिव ग्रीन ड्रेस पहनना और बंदूक चलाना चाहती थी। उन्होंने बताया कि मेरे कुछ रिश्तेदार सेना में थे और मुझे सेना में जाने के लिए उनसे प्रेरणा मिली। मैंने फिफजिकल टेस्ट के लिए काफफी क़डी तैयारी की थी। मैं सेना की पहली महिला जवान बनी हूं तो इस पर मेरे परिवार को गर्व है। रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग कैंप में शांति ने बंदूक चलाने के कौशल में फफायरिंग इंस्ट्रक्टरों को काफफी प्रभावित किया। उन्होंने मार्क्स ैन की सबसे ऊंची पोजिशन हासिल की। एक अधिकारी ने बताया कि कैंप में फिफजिकल टेस्ट, ड्रिल, फफायरिंग समेत उनके पूरे प्रदर्शन के आधार पर बेस्ट ट्रेनी घोषित किया गया।

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