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जब जयराम रमेश ने आपा खोया « Vidarbha ki Baat

जब जयराम रमेश ने आपा खोया

बेंगलूर, ६ फरवरी। बीटी बैगन को बाजार में लाने से पहले जगहजगह घूम कर इसके पक्ष में समर्थन जुटाने और लोगों की राय जानने की कवायद कर रहे केंद्रीय पर्यावरण मंत्री शनिवार को यहां गुस्से में आ गए। रमेश के कार्यक्रम में अराजकता, गुस्सा, हाजिरजवाबी, बेतुकी बयानबाजी और कुछ वैज्ञानिक तर्कवितर्क का मिला जुला नजारा देखने को मिला। बीटी बैगन के व्यावसायिक उत्पादन का समर्थन और विरोध करने वाले समूहों ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को आडेμ हाथों लिया। नतीजतन एक बार रमेश आपा खो बैठे और एक व्यक्ति को दिमाग का इलाज करवाने की नसीहत तक दे डाली। जैविक रूप से संशोधित बैगन के व्यावसायिक उत्पादन के मुद्दे पर पर्यावरण मंत्री को १० फरवरी तक फैसला लेना है। इससे पहले वह ६ शहरों में बैठक कर किसानों, गैर सरकारी संगठनों, वैज्ञानिकों और आम लोगों की राय ले चुके हैं। शनिवार को बेंगलूर में ७वीं और संभवत: आखिरी बैठक थी। इसमें गैर सरकारी संगठन, किसान, डाक्टर और वैज्ञानिक बीटी बैगन के व्यावसायिक उत्पादन के पक्ष विपक्ष में अपनी बातें मंत्री के सामने रख रहे थे। करीब स़ाढे तीन घंटे चली बहस में रमेश कई बार प्रोफेसर की भूमिका में नजर आए। उन्होंने लोगों को कहा कि यह संसद नहीं है, जो इतना शोर मचा रहे हैं। फिर उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा संसद का रोग सब जगह फैल रहा है। संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण रोक देना चाहिए। इसी बीच एक व्यक्ति ने रमेश को बीटी बैगन का बीज उत्पादन करने वाली अमेरिकी कंपनी मोंसांटो का एजेंट कह दिया। इसके बाद तो पर्यावरण मंत्री का खुद पर काबू ही नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाने वाले को फौरन जवाब दिया आपको दिमागी इलाज की जरूरत है।

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