क्या नेताआें के घर में नहीं होती लोडशेडिंग?

<ीींीेपसनहीं चलेंगीनहीं चलेंगी बिजली कंपनी की मनमानी नहीं चलेंगी, मुर्दाबादमुर्दाबाद। अरे यार बीडू देख तो रे सही कौन मोर्चा लेकर जा रहा है, एक तो पहले ही बत्ती गुल हो गई है, अपुन थ़ोडी देर चैन से बैठने देखा तो ये मोर्चा आ गया है। इतने में सर्किट तपाक से बोल प़डा भाई मैं बोलू ये मोर्चा तो लोडशेडिंग के खिलाफफ निकाला गया है। अरे सर्किट मोर्चा बोले तो वो इच न जिसमें भ़ीड होती है और नारेबाजी होती है। भाई ठीक समझा वो इच मोर्चा जिसमें सिफर्फ नारेबाजी होती है। बीडू यह सब सुनते रहा फिफर उससे नहीं रहा गया तो वह बोल प़डाभाई ऐसे इच मोर्चेवोर्चे से तो अपुन का भेजा खराब हो जाता है। अपुन के भेजे में एक बात समझ में इच नहीं आती है कि ये नेता लोग जो ब़डीब़डी गा़डयों में घूमता, ब़डीब़डी बातें करता, पब्लिक को फफोकट को भाषण पिलाता है क्या उनके घर में बिजली गुल नहीं होती है। सब एक नंबर का स्वार्थी है, नेता नाम ही उसी का है, जो सिफर्फ लेता ही लेता है पण कुछ नहीं देता

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