नासुप्र ने जवाब देने के लिए समय मांगा

नागपुर, २६ जून। घर संकुल के आवासों और औद्योगिक प्लाटों के आवंटन में ब़डे पैमाने पर धांधली होने के आरोपों के संबंध में जवाब देने के लिए नागपुर सुधार प्रन्यास ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ से गुरुवार को समय मांगा। न्यायाधीश दिलीप सिन्हा व सीएल पंगारकर की संयुक्तपीठ ने नासुप्र की प्रार्थना स्वीकार कर जवाब पेश करने के लिए उसे दो सप्ताह का समय दिया है। ज्ञात हो कि समाजसेवक जितेन्द्र गोसेकर ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के समक्ष याचिका पेश कर नागपुर सुधार प्रन्यास द्वारा तैयार की गई घर संकुल योजना के आवासों के आवंटन में भारी पैमाने में धांधली होने के आरोप लगाए है। इसी तरह याचिकाकर्ता ने सुधार प्रन्यास द्वारा आवंटित औद्योगिक प्लाटों के आवंटन में भी धांधली होने के आरोप लगाए है। याचिकाकर्ता ने बताया कि नासुप्र ने नंदनवन, मौजा नारी, पंधरी, मानकापुर व अन्य जगह गरीबी रेखा के नीचे के नागरिकों के लिए घर संकुल योजना के तहत आवास बनाए थे परंतु नासुप्र के भ्रष्ट अधिकारियों ने स्वयं के निजी स्वार्थ के लिए इनमें से अधिकांश आवास ऐसे नागरिकों को आवंटित कर डाले हैं जो गरीबी रेखा के नीचे आते ही नहीं है अपितु धन संपन्न है। इसी तरह से औद्योगिक प्लाट के आवंटन में धांधली होने एवं अन्य प्लांटों को जिस मकसद से आवंटित किया गया था उस मकसद को छ़ोडकर किसी अन्य मकसद के लिए उपयोग किए जाने के बावजूद नासुप्र के अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। याचिकाकर्ता ने उन आवास व औद्योगिक प्लाटों का आवंटन रद्द करने के आदेश देने की प्रार्थना की है जो गैर हकदार लोगों को आवंटित किए गए है साथ ही आवंटन में हुई धांधली की जांच करने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के आदेश देने की प्रार्थना की है।

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